उर्दू शायरी · ग़ज़ल

daen bazu mein gaDa tir nahin khinch saka

दाएँ बाज़ू में गड़ा तीर नहीं खींच सका

دائیں بازو میں گڑا تیر نہیں کھینچ سکا

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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दाएँ बाज़ू में गड़ा तीर नहीं खींच सका
इस लिए ख़ोल से शमशीर नहीं खींच सका

शोर इतना था कि आवाज़ भी डब्बे में रही
भीड़ इतनी थी कि ज़ंजीर नहीं खींच सका

हर नज़र से नजर-अंदाज़-शुदा मंज़र हूँ
वो मदारी हूँ जो रहगीर नहीं खींच सका

मैं ने मेहनत से हथेली पे लकीरें खींचीं
वो जिन्हें कातिब-ए-तक़दीर नहीं खींच सका

मैं ने तस्वीर-कशी कर के जवाँ की औलाद
उन के बचपन की तसावीर नहीं खींच सका

मुझ पे इक हिज्र मुसल्लत है हमेशा के लिए
ऐसा जिन है कि कोई पीर नहीं खींच सका

तुम पे क्या ख़ाक असर होगा मिरे शे'रों का
तुम को तो मीर-तक़ी-'मीर' नहीं खींच सका