उर्दू शायरी · ग़ज़ल

badan ka tafsili jaeza ghum kar liya hai

बदन का तफ़सीली जाएज़ा घूम कर लिया है

بدن کا تفصیلی جائزہ گھوم کر لیا ہے

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बदन का तफ़सीली जाएज़ा घूम कर लिया है
'इलाक़ा आफ़त-ज़दा है मा'लूम कर लिया है

कोई लतीफ़ा था जिस में यारों का ज़िक्र आया
उसे हँसाना था ख़ुद को मग़्मूम कर लिया है

मैं ख़ुश हूँ अब नाम होगा फ़ेहरिस्त-ए-अहल-ए-ग़म में
जभी बिछड़ने का फ़ैसला झूम कर लिया है

सनद रहे ताकि और ज़रूरत के वक़्त काम आए
तमाम-तर इज़्तिराब मंज़ूम कर लिया है

ये कौन शौक़ीन है ख़ला के मुशाहिदे का
मिरी तरफ़ किस ने कैमरा ज़ूम कर लिया है

बदन में सिर्फ़ एक की जगह थी सो मैं ने ख़ुद को
तुम्हारी मौजूदगी में मा'दूम कर लिया है

ज़बान सी लौ निकाल कर मुँह चिढ़ा रहा था
हवा ने बदला चराग़ को चूम कर लिया है