उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab is se baDh ke karun kya KHarab main usko

अब इस से बढ़ के करूँ क्या ख़राब मैं उस को

اب اس سے بڑھ کے کروں کیا خراب میں اس کو

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब इस से बढ़ के करूँ क्या ख़राब मैं उस को
कि ठीक लगने लगा हूँ जनाब मैं उस को

मैं एक पेड़ तले बैठता हूँ रोता हूँ
वो छाँव देता है मुझ को और आब मैं उस को

वो चाहता है कि नाकाम हो मोहब्बत में
न होने दूँगा कभी कामयाब मैं उस को

नदी में देखता ख़ुद को वो और देखते थे
दरख़्त घास दरिंदे गुलाब मैं उस को

शबें तो नींद से 'आरी थीं दोनों की लेकिन
वो रोज़ मुझ को सुनाता था ख़्वाब मैं उस को

दिया न वक़्त तक उस को सवाल करने का
समझ रहा था कि दूँगा जवाब मैं उस को

वो गिरवी रख भी चुका दो तिहाई जब कि 'उमैर'
हुआ नहीं हूँ अभी दस्तयाब मैं उस को