उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aage the humse rah-e-adam mein nahin rahe

आगे थे हम से राह-ए-'अदम में नहीं रहे

آگے تھے ہم سے راہ عدم میں نہیں رہے

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आगे थे हम से राह-ए-'अदम में नहीं रहे
जाने वो सब कहाँ हैं जो हम में नहीं रहे

हम भी रहे हैं दश्त-ए-सुख़न में कई बरस
लेकिन तलाश-ए-नक़्श-ए-क़दम में नहीं रहे

कुछ हो गए थे तेरी ख़ुशी के लिए फ़ना
जो रह गए थे वो तिरे ग़म में नहीं रहे

सहरा-नवर्द आ के हमारा मकान देख
हम भी किसी ख़राबे से कम में नहीं रहे

हैरान क्यों हो देख के पोरें मिटी हुई
पहले कभी तुम अहल-ए-क़लम में नहीं रहे

तुम उस के दिल में रह न सके साथ रह के भी
मक्की हो और सेहन-ए-हरम में नहीं रहे

एक एक कर के झड़ गईं पलकें मिरी 'उमैर'
ख़ुश्की के पेड़ ख़ित्ता-ए-नम में नहीं रहे