उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi se mujhe chhuDa bhi de

ज़िंदगी से मुझे छुड़ा भी दे

زندگی سے مجھے چھڑا بھی دے

शायर: Baloch Mehfooz Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी से मुझे छुड़ा भी दे
चैन की नींद अब सुला भी दे

थक गया हूँ मुसीबतों से मैं
हाँ मुझे अब कफ़न उढ़ा भी दे

रास्ते बंद हो चुके हैं सब
अब नया रास्ता बना भी दे

ख़ूब झेला बुरे पयामों को
कुछ ख़बर ख़ैर की सुना भी दे

पूछते हैं सभी मिरा पेशा
क्या कहूँ मैं ज़रा बता भी दे

सब्र की इंतिहा हुई या-रब
अब मुझे सब्र का सिला भी दे