उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main hun KHamosh yar ke aage

मैं हूँ ख़ामोश यार के आगे

میں ہوں خاموش یار کے آگے

शायर: Baloch Mehfooz Khan10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं हूँ ख़ामोश यार के आगे
दिल है मजबूर प्यार के आगे

मैं तो बस ढेर हो गया दिलबर
तेरी आँखों के वार के आगे

तुम भी मजबूर हो गए हो क्या
क़ल्ब-ए-बे-इख़्तियार के आगे

फूल कितने भी ख़ूबसूरत हों
ना-तवाँ हैं वो ख़ार के आगे

मैं तो उफ़ तक न कर सका या-रब
तेरी इस सख़्त मार के आगे

ये नज़ारे तमाम फीके हैं
एक बे-रोज़गार के आगे

दर्द-ए-'आशिक़ भी हार जाता है
दर्द-ए-बे-रोज़गार के आगे

अपनी दीवानगी की बातों को
मत रखो होशियार के आगे

बात करते हो तुम मोहब्बत की
इस दिल-ए-बे-क़रार के आगे

क़ल्ब-ए-'महफ़ूज़' डर नहीं सकता
ज़ुल्म के इक़्तिदार के आगे