उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aansu baha ke dekh chuka kuchh hua nahin

आँसू बहा के देख चुका कुछ हुआ नहीं

آنسو بہا کے دیکھ چکا کچھ ہوا نہیں

शायर: Baloch Mehfooz Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँसू बहा के देख चुका कुछ हुआ नहीं
ख़ुद को मिटा के देख लिया कुछ मिला नहीं

ता'मीर-ए-ज़िंदगी के लिए क्या नहीं किया
फिर भी ये ए'तिराज़ कि कुछ भी किया नहीं

मुझ को मिरे ख़ुदा से गिले हैं कई मगर
मुझ को मु'आशरे से ज़रा भी गिला नहीं

चौबीस साल ख़त्म हुए 'उम्र के मगर
घर से निकल के चार क़दम मैं चला नहीं

थी काम की तलाश मुझे एक 'उम्र से
लेकिन दुरुस्त काम कहीं भी मिला नहीं

'महफ़ूज़' एक शख़्स अभी तक जहाँ में है
या'नी वो ना-मुराद अभी तक मरा नहीं