उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi se pyar jatana mujhe nahin aata

किसी से प्यार जताना मुझे नहीं आता

کسی سے پیار جتانا مجھے نہیں آتا

शायर: Baloch Mehfooz Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी से प्यार जताना मुझे नहीं आता
किसी से आँख मिलाना मुझे नहीं आता

तमाम 'उम्र निभाता रहा ख़ुदी से ही
किसी का साथ निभाना मुझे नहीं आता

मिरा मिज़ाज ज़माने से मुख़्तलिफ़ ठहरा
सभी से हाथ मिलाना मुझे नहीं आता

उदासियों के अंधेरे बसे रहे मुझ में
चराग़ दिल का जलाना मुझे नहीं आता

मुझे सभी ने सुनाए बहुत बुरे ता'ने
मगर किसी को सुनाना मुझे नहीं आता

ग़म-ए-जहाँ से मुझे आप ही छुड़ा लेना
ग़मों से जान छुड़ाना मुझे नहीं आता