उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai maut tu kahan hai tera intizar hai

ऐ मौत तू कहाँ है तिरा इंतिज़ार है

اے موت تو کہاں ہے ترا انتظار ہے

शायर: Baloch Mehfooz Khan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ मौत तू कहाँ है तिरा इंतिज़ार है
मिलने को तुझ से दिल ये मिरा बे-क़रार है

दुनिया को मुझ से आज भी है सख़्त दुश्मनी
इक मैं हूँ जिस को आज भी दुनिया से प्यार है

उस ने तो ख़ैर मुझ पे निगाह-ए-करम न की
और एक मेरा दिल है जो उस पर निसार है

वो तीर उस ने मुझ पे चलाया कि पूछ मत
सीने से यूँ गया है कि बस दिल के पार है

दीवानगी के साथ ज़रा 'अक़्ल भी रखो
दुनिया क़दम क़दम पे बहुत होशियार है