उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein jo baat hai wo baat bataun kaise

दिल में जो बात है वो बात बताऊँ कैसे

دل میں جو بات ہے وہ بات بتاؤں کیسے

शायर: Baloch Mehfooz Khan12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में जो बात है वो बात बताऊँ कैसे
दिल के जज़्बात सुनाऊँ तो सुनाऊँ कैसे

दिल के टुकड़े हुए इस तरह के आईना हो
दिल के टुकड़ों को गिनाऊँ तो गिनाऊँ कैसे

मुझ से रूठा है मिरा रब मिरी करतूतों से
अपने मालिक को मनाऊँ तो मनाऊँ कैसे

उन के चेहरे पे जो बल है तो सबब मैं ही हूँ
उन के रुख़्सार पे मुस्कान को लाऊँ कैसे

'आशिक़ों से ये गुज़ारिश है मुझे सिखला दो
उन के आने पे मैं पलकों को बिछाऊँ कैसे

दिल की धड़कन नहीं रुकती ये परेशानी है
कोई कह दो के मैं इस दिल को सुलाऊँ कैसे

उन का दर बंद है मुझ पर जो कभी जाऊँ तो
वो बुलाते ही नहीं मुझ को तो जाऊँ कैसे

मैं ने सौ बार कहा उन से कि दामन छोड़ो
वो न छोड़ें तो मैं दामन को छुड़ाऊँ कैसे

ज़ख़्म दिल के तो छुपाने से नहीं छुपते हैं
दर्द-ए-दिल तुम से छुपाऊँ तो छुपाऊँ कैसे

मैं ने चाहा मिरी हस्ती को मिटाना लेकिन
जो फ़ना हो न सके उस को मिटाऊँ कैसे

वो ये कहते हैं झुका ग़ैर के आगे सर को
अपना सर ग़ैर के आगे मैं झुकाऊँ कैसे

भूलने पर भी जो हर बार मुझे याद आए
क़ल्ब-ए-‘महफ़ूज़’ से वो नाम भुलाऊँ कैसे