उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab kisi se KHafa nahin hun main

अब किसी से ख़फ़ा नहीं हूँ मैं

اب کسی سے خفا نہیں ہوں میں

शायर: Baloch Mehfooz Khan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब किसी से ख़फ़ा नहीं हूँ मैं
मर चुका हूँ मिटा नहीं हूँ मैं

जो नहीं हूँ वही दिखा हूँ मैं
और जो हूँ दिखा नहीं हूँ मैं

ग़ैर के सामने झुकाऊँ सर
इस क़दर बेवफ़ा नहीं हूँ मैं

मौत ही काश चैन दे मुझ को
ज़िंदगी को जचा नहीं हूँ मैं

हर दु'आ बे-असर रहे मेरी
इस क़दर तो बुरा नहीं हूँ मैं