उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi kaise ajab moD pe le aai hai

ज़िंदगी कैसे 'अजब मोड़ पे ले आई है

زندگی کیسے عجب موڑ پہ لے آئی ہے

शायर: Aafreen Faheem Aafi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी कैसे 'अजब मोड़ पे ले आई है
भीड़ सी भीड़ है तन्हाई सी तन्हाई है

जो भी मिलता है दु'आ देता है मरने की मुझे
दिल लगाने की भी क्या ख़ूब सज़ा पाई है

सर उठाती हुई हसरत का हुआ क़त्ल-ए-'आम
दिल वो दुनिया है जहाँ 'आलम-ए-तन्हाई है

तुम मिरे सामने आओ तो 'इनायत होगी
दिल की दहलीज़ पे बैठी हुई तन्हाई है

जिस के जीने के लिए तुम ने दु'आ माँगी हो
ऐसे 'आशिक़ को भला मौत कहाँ आई है

ख़ाक रक्खेगा मिरे ज़ख़्म पे मरहम 'आफ़ी'
ये ज़माना जो हक़ीक़त में तमाशाई है