उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek mulaqat ka bas tum se bahana chaha

इक मुलाक़ात का बस तुम से बहाना चाहा

اک ملاقات کا بس تم سے بہانا چاہا

शायर: Aafreen Faheem Aafi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक मुलाक़ात का बस तुम से बहाना चाहा
हम ने कब अपने लिए सारा ज़माना चाहा

तुम ने जो ज़ख़्म दिए हम को बतौर-ए-तोहफ़ा
चादर-ए-अश्क में हर ग़म को छुपाना चाहा

मैं ने कब माँगी हुकूमत या कोई तख़्त या ताज
ज़िंदगानी में फ़क़त साथ तुम्हारा चाहा

तुम ने दामन को पकड़ कर मुझे रोका हर दम
मैं ने जब जब भी मोहब्बत से किनारा चाहा