उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is liye aate hain sailab meri aankhon mein

इस लिए आते हैं सैलाब मिरी आँखों में

اس لیے آتے ہیں سیلاب مری آنکھوں میں

शायर: Aafreen Faheem Aafi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस लिए आते हैं सैलाब मिरी आँखों में
जागते रहते हैं कुछ ख़्वाब मिरी आँखों में

ये मोहब्बत के बड़े ख़ास सबक़ होते हैं
तुम ने देखे हैं जो आदाब मिरी आँखों में

मैं वो सहरा जहाँ उम्मीद नहीं बारिश की
डूबते जाते हैं सैराब मिरी आँखों में

उस की याद आए तो आँखों से रवाँ हो जाएँ
आज कुछ अश्क हैं बेताब मिरी आँखों में

इक तरफ़ घूमती दुनिया का हर इक मंज़र है
इक तरफ़ चेहरा-ए-नायाब मिरी आँखों में

भेज दो 'आफ़ी' तबस्सुम की कोई ताज़ा ख़िज़ाँ
ज़ख़्म होने लगे शादाब मिरी आँखों में