उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek ajnabi se pyar kiya hae kya kiya

इक अजनबी से प्यार किया हाए क्या किया

اک اجنبی سے پیار کیا ہائے کیا کیا

शायर: Aafreen Faheem Aafi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक अजनबी से प्यार किया हाए क्या किया
ख़ुद दिल को तार तार किया हाए क्या किया

दिल को सुकूत-ए-दर्द पे माइल भी कर लिया
आँखों को आबशार किया हाए क्या किया

जब दिल मिरा हर एक तमन्ना से भर गया
फिर तेरा इंतिज़ार किया हाए क्या किया

मय्यत पे मेरी आया है ले कर रक़ीब को
उस वक़्त मुझ पे वार किया हाए क्या किया

ये 'इश्क़ एक राज़ था दुनिया के वास्ते
और तुम ने इश्तिहार किया हाए क्या किया