उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi gyan se nikalte hain

ज़िंदगी ज्ञान से निकलते हैं

زندگی گیان سے نکلتے ہیں

शायर: Nadeem Najid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी ज्ञान से निकलते हैं
हद-ए-इमकान से निकलते हैं

जब भी इज़हार-ए-'इश्क़ करता हूँ
लफ़्ज़ बे-जान से निकलते हैं

कूचा-ए-'इश्क़ से न जाने क्यों
लोग हैरान से निकलते हैं

अब हमें सोचते रहा करना
हम तिरे ध्यान से निकलते हैं

आज ये दूरियाँ मिटा डालें
आज नुक़्सान से निकलते हैं