उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dasht mein ashk bahaen to sabhi sar rakkhen

दश्त में अश्क बहाएँ तो सभी सर रक्खें

دشت میں اشک بہائیں تو سبھی سر رکھیں

शायर: Nadeem Najid4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दश्त में अश्क बहाएँ तो सभी सर रक्खें
क्यों न मिल कर यहाँ बुनियाद-ए-समंदर रक्खें

हम सभी काम मोहब्बत से लिया करते हैं
दोस्त शमशीर को पर्दे ही के अंदर रक्खें

हम हैं 'उश्शाक़ सो मुट्ठी में जहाँ रखते हैं
और घुँगरू की छना-छन में क़लंदर रक्खें

ये तो फ़ितरत के तक़ाज़ों के मुनाफ़ी है 'नदीम'
दिल की जो बात है वो दिल ही के अंदर रक्खें