उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhyan mein late hain yun bhi teri baaton ke charagh

ध्यान में लाते हैं यूँ भी तिरी बातों के चराग़

دھیان میں لاتے ہیں یوں بھی تری باتوں کے چراغ

शायर: Nadeem Najid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ध्यान में लाते हैं यूँ भी तिरी बातों के चराग़
देखना चाहते हैं हम तिरी रातों के चराग़

'आम सी शब को शब-ए-ख़ास बना देते हैं
इक तिरी याद में जलती हुई आँखों के चराग़

शहर-ए-याराँ में कहीं कोई शनासा ही नहीं
न वो बरगद न क़बीला न रिवाजों के चराग़

आज भी यार बरसती हैं किसी की आँखें
आज भी कोई जलाता है मुरादों के चराग़

ख़ुश-नसीबी से हम इक ताक़ में रौशन हैं यहाँ
कम ही मिलते हैं वगरना ये मिज़ाजों के चराग़