उर्दू शायरी · ग़ज़ल

charagh-o-taq mein bedar ho gain aankhen

चराग़-ओ-ताक़ में बेदार हो गईं आँखें

چراغ و طاق میں بیدار ہو گئیں آنکھیں

शायर: Nadeem Najid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चराग़-ओ-ताक़ में बेदार हो गईं आँखें
ब-फ़ैज़-ए-'इश्क़ समझदार हो गईं आँखें

तुमहारा 'अक्स उतारा है मुद्दतों इन में
'अजब नहीं है जो तहदार हो गईं आँखें

ये सोते जागते जो ख़्वाब देखने लगी हैं
जनाब 'इश्क़ से दो-चार हो गईं आँखें

ये जान लेती हैं सब हालतें तिरे दिल की
मुराद ये है कि अवतार हो गईं आँखें

न लौटने को था जाना किसी को साथ उस के
सो बिन बताए ही तय्यार हो गईं आँखें