उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aap mat kijiye yaqin sahab

आप मत कीजिए यक़ीं साहब

آپ مت کیجیے یقیں صاحب

शायर: Nadeem Najid4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आप मत कीजिए यक़ीं साहब
'इश्क़ में फ़ुर्सतें नहीं साहब

आख़िर-ए-कार एक हो गए हैं
'इश्क़ दहलीज़ और जबीं साहब

हम कि पहले-पहल मिले थे जहाँ
आज फिर से मिलें वहीं साहब

अब चराग़ों को पुश्त लाज़िम है
रू-ब-रू है वो मह-जबीं साहब