उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi dasht mein guzari hai

ज़िंदगी दश्त में गुज़ारी है

زندگی دشت میں گزاری ہے

शायर: Umood Abrar Ahmad11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी दश्त में गुज़ारी है
जिस का हासिल ये बुर्दबारी है

मौत का नाम ले रहे हो तुम
ज़िंदगी कब भला हमारी है

शाम वो घर को देर से पहुँचा
जिस की आँखों में ख़्वाब जारी है

लाख रक्खी हैं हसरतें तुम ने
जाने किस बात की ख़ुमारी है

हम ज़माने को पढ़ने निकले थे
अब तो ख़ुद दास्ताँ हमारी है

बंद दरवाज़े ही मिलेंगे तुम्हें
इस क़दर मुझ पे ख़ौफ़ तारी है

सच का पर्दा उठा तो ये जाना
ज़िंदगी झूट में गुज़ारी है

जिस का हासिल भी ख़ुद में ला-हासिल
इस से बेहतर तो जाँ-निसारी है

जब तमन्ना ही उठ गई दिल से
फिर भी क्यों जुस्तुजू तुम्हारी है

तू ने रख्खा है सर तो बतला दूँ
मेरे शानों पे बोझ भारी है

सब को हँसता दिखा हसीं चेहरा
दिल के अंदर तो आह-ओ-ज़ारी है