उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mohabbat se bhar na jae kahin

दिल मोहब्बत से भर न जाए कहीं

دل محبت سے بھر نہ جائے کہیں

शायर: Umood Abrar Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल मोहब्बत से भर न जाए कहीं
तू भी यक-दम मुकर न जाए कहीं

थाम लेती हूँ ख़ुद को पल पल मैं
दिल ये अश्कों से भर न जाए कहीं

मैं ज़माने से थक चुकी यारो
अब ये मेरी नज़र न जाए कहीं

आने वाले ख़िज़ाँ के मौसम में
हार तन्हा शजर न जाए कहीं

आँख पुर-नम है लब पे ख़ामोशी
मौज-ए-दरिया उतर न जाए कहीं

इन तग़ाफ़ुल भरी अदाओं से
मेरी हस्ती बिखर न जाए कहीं

कोई उस को मिरी ख़बर दे दे
वक़्त जल्दी गुज़र न जाए कहीं