उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab bahaya hi nahin aankh se pani maine

जब बहाया ही नहीं आँख से पानी मैं ने

جب بہایا ہی نہیں آنکھ سے پانی میں نے

शायर: Umood Abrar Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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जब बहाया ही नहीं आँख से पानी मैं ने
एक ही लफ़्ज़ में लिख दी है कहानी मैं ने

ज़ब्त तूफ़ान का टूटा न कभी सीने में
रोक रक्खी है समुंदर की रवानी मैं ने

शब्द बे-ख़ौफ़ किताबों में उतारे मैं ने
फिर किताबों पे जमी ख़ाक भी छानी मैं ने

मुझ को विज्दान था सैलाब ने तो आना है
देख ली ख़्वाब में इस शाम निशानी मैं ने

आरज़ूओं ने मिरे दिल में तबाही कर दी
फिर किसी चाह की उम्मीद न ठानी मैं ने

तू ने समझा था मुझे आज भी पागल हूँ वही
'आदतें छोड़ दीं जितनी थी पुरानी मैं ने

क्या बताऊँ मैं उसे 'उम्र-ए-गुरेज़ाँ से 'उमूद'
सीख ली दश्त में अब ख़ाक उड़ानी मैं ने