उर्दू शायरी · ग़ज़ल

farsh se arsh pe aawaz lagai maine

फ़र्श से 'अर्श पे आवाज़ लगाई मैं ने

فرش سے عرش پہ آواز لگائی میں نے

शायर: Umood Abrar Ahmad9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़र्श से 'अर्श पे आवाज़ लगाई मैं ने
दास्ताँ दर्द की हर गाम सुनाई मैं ने

ख़ामुशी दर्द के 'उन्वान से तहरीर हुई
ज़ीस्त को दार-ओ-रसन तक दी रसाई मैं ने

तेज़ बारिश से दर-ओ-बाम महक उठ्ठे थे
हालत-ए-‘इश्क़ में जब धूम मचाई मैं ने

मैं ने क़िर्तास पे हर ज़ख़्म सजाया और फिर
जागती आँखों की तस्वीर बनाई मैं ने

क्या सितम है कि तिरे बा'द जो तकलीफ़ हुई
उस की रूदाद किसी को न सुनाई मैं ने

देख कर आप को उस ख़्वाब-नगर में शब भर
अपनी सोई हुई तक़दीर जगाई मैं ने

क्या बताऊँ मैं ज़माने की तबाही का सबब
बस तिरे नाम पे लिख दी है ख़ुदाई मैं ने

ज़िंदगी कार-ए-मोहब्बत के 'अलावा नहीं कुछ
अपनी हर साँस में ये बात समाई मैं ने

रूह सी फूँक गया जिस्म के अंदर वो 'उमूद'
गीली मिट्टी पे 'अजब शक्ल दिखाई मैं ने