उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hadse zist ke is dil mein jo ghar karte hain

हादसे ज़ीस्त के इस दिल में जो घर करते हैं

حادثے زیست کے اس دل میں جو گھر کرتے ہیں

शायर: Umood Abrar Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हादसे ज़ीस्त के इस दिल में जो घर करते हैं
दश्त-ए-आग़ोश में वो 'उम्र बसर करते हैं

मेरे हिस्से में मोहब्बत नहीं लिक्खी लेकिन
मेरी आँखों में कई ख़्वाब सफ़र करते हैं

इस लिए ख़ुद को मिटाना भी ज़रूरी समझा
ग़म ज़माने के मिरे दिल पे असर करते हैं

अब तो बनता ही नहीं तेरा परायों से गिला
हाल बेहाल यहाँ अपने अगर करते हैं

इस लिए तोड़ के बैठी हूँ त'अल्लुक़ दिल से
अब कहाँ लोग मोहब्बत की क़दर करते हैं

मान जाती हूँ मैं हर बात मिन-ओ-‘अन उस की
इस क़दर फ़हम-ओ-फ़रासत से ख़बर करते हैं

तू ने देखा ही नहीं दिल में ख़ज़ानों को 'उमूद'
इन में कुछ साँप हैं जो सब पे नज़र करते हैं