उर्दू शायरी · ग़ज़ल

de tasalli mere KHuda koi

दे तसल्ली मिरे ख़ुदा कोई

دے تسلی مرے خدا کوئی

शायर: Umood Abrar Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दे तसल्ली मिरे ख़ुदा कोई
हाल-ए-दिल की नहीं दवा कोई

हालत-ए-रंज में हुआ मा'लूम
कैसे करता है इल्तिजा कोई

तुम से जुड़ती हैं दिल की दीवारें
आओ कर दें मकाँ खड़ा कोई

क्या यही 'इश्क़ है मोहब्बत है
मुझ को मिलता नहीं सिरा कोई

तुझ से निस्बत 'अजीब निस्बत है
मुझ को अपना नहीं पता कोई

वो भी होने लगा जुदा मुझ से
जिस को अपना नहीं मिला कोई

सब ही हालात के हैं मारे हुए
मुश्किलों से नहीं बचा कोई