उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi bhar ke liye sath tumhaara hota

ज़िंदगी भर के लिए साथ तुम्हारा होता

زندگی بھر کے لئے ساتھ تمہارا ہوتا

शायर: Faisal Shahzad8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी भर के लिए साथ तुम्हारा होता
हम ने चाहा था कि इक तू ही हमारा होता

तेरे हाथों में अगर हाथ हमारा होता
फिर ख़सारे पे भले हम को ख़सारा होता

छोड़ कर ख़ुद को तिरे पास चला आता मैं
तू ने इक बार अगर दिल से पुकारा होता

तीरगी तेरे शबिस्ताँ की मिटा देते हम
हाथ में कोई दिया कोई सितारा होता

दो क़दम साथ अगर चलते ज़माने से जुदा
मुझ पे एहसान मिरी जान तुम्हारा होता

सारी दुनिया को कहीं ताक़ पे हम रख देते
तेरी जानिब से अगर कोई इशारा होता

लब-ओ-रुख़्सार मिरे हाथ से सजते तेरे
अपने हाथों से तिरा चेहरा सँवारा होता

हम ने रोका भी नहीं इस लिए उस को 'फ़ैसल'
वो तो अपना भी न था कैसे हमारा होता