उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aisa bhi kahin dekha hai manzar use kahna

ऐसा भी कहीं देखा है मंज़र उसे कहना

ایسا بھی کہیں دیکھا ہے منظر اسے کہنا

शायर: Faisal Shahzad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसा भी कहीं देखा है मंज़र उसे कहना
सहरा है मिरी आँख के अन्दर उसे कहना

तुझ को भी कोई शक है तो फिर आ मैं दिखाऊँ
शाहों में भी बैठे हैं गदागर उसे कहना

कैसे मैं कहूँ चेहरा वो ऐसा है कि जैसे
पूनम के हसीं चाँद का मंज़र उसे कहना

अब उस को मिरे लम्स की ख़ुशबू नहीं मिलनी
अब 'ऊद लगाए कि वो 'अम्बर उसे कहना

होता है कोई ख़ौफ़ न डर उस को किसी का
उड़ता है हवाओं में क़लंदर उसे कहना

तेरे ही तरफ़-दार तिरी सम्त बढ़ेंगे
हाथों में उठाए हुए ख़ंजर उसे कहना

हर बात को सह लेता हूँ चुप-चाप मैं हँस कर
जैसे कि मिरा दिल हो समुंदर उसे कहना