उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas ek jaan hi baqi hai jaan mat lena

बस एक जान ही बाक़ी है जान मत लेना

بس ایک جان ہی باقی ہے جان مت لینا

शायर: Faisal Shahzad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस एक जान ही बाक़ी है जान मत लेना
हमारे सब्र का तुम इम्तिहान मत लेना

सभी के सामने हम को भरी 'अदालत में
हमें बुला के हमारा बयान मत लेना

ये लोग शहर के देहातियों से ज़ालिम हैं
सो अपने गाँव से हिजरत की ठान मत लेना

फ़लक ज़मीन पे तुम को पटख़ के फेंकेगा
तुम आसमान से ऊँची उड़ान मत लेना

वहाँ से बा'द में मुमकिन है कोएला निकले
मिले जो मुफ़्त भी हीरे की कान मत लेना

उधार माँग के वापस कोई नहीं करता
हमारे शहर में कोई दुकान मत लेना

वफ़ा निभाता नहीं कोई 'उम्र भर 'फ़ैसल'
किसी से 'अह्द किसी से ज़बान मत लेना