उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi bhar humse mat puchho ki kya karte rahe

ज़िंदगी भर हम से मत पूछो कि क्या करते रहे

زندگی بھر ہم سے مت پوچھو کہ کیا کرتے رہے

शायर: Naeem Badayuni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी भर हम से मत पूछो कि क्या करते रहे
गर्दिश-ए-दौराँ का जम कर सामना करते रहे

गुलसिताँ तो जल गया लेकिन मुहिब्बान-ए-चमन
आप से हम पूछते हैं आप क्या करते रहे

शहर सारा नफ़रतों की आग में जलता रहा
आप थे कि घर में बैठे मशवरा करते रहे

लुट गया सब कुछ तो गहरी नींद से आँखें खुलीं
हम को क्या करना था यारो और क्या करते रहे

उन की नज़रों को न भाया दूसरा कोई 'न'ईम'
मुझ पे ही वो हर सितम की इंतिहा करते रहे