उर्दू शायरी · ग़ज़ल

allah jaane kaisa chaman par azab hai

अल्लाह जाने कैसा चमन पर 'अज़ाब है

اللہ جانے کیسا چمن پر عذاب ہے

शायर: Naeem Badayuni6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अल्लाह जाने कैसा चमन पर 'अज़ाब है
काँटों पे है शबाब फ़सुर्दा गुलाब है

हर वक़्त मुतमइन हूँ मैं अपनी हयात से
मुझ पर किसी का लुत्फ़-ओ-करम बे-हिसाब है

दामन है चाक चेहरा फ़सुर्दा और आँख नम
जो कुछ भी है ये बख़्शिश-ए-'आली-जनाब है

ता'बीर सब को ख़्वाब की मिलती नहीं मगर
ता'बीर जिस की तुम हो हक़ीक़त वो ख़्वाब है

वो ख़ुद भी चल रहे हैं ज़माने के साथ साथ
और फिर भी कह रहे हैं ज़माना ख़राब है

मंज़िल क़दम 'न'ईम' के चूमेगी एक दिन
जब उस के साथ आप का ग़म हम-रिकाब है