उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apnon ke karam se gar tu dur raha hota

अपनों के करम से गर तू दूर रहा होता

اپنوں کے کرم سے گر تو دور رہا ہوتا

शायर: Naeem Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनों के करम से गर तू दूर रहा होता
एहसान के शो'लों से दामन न जला होता

दामन मिरा दुनिया की दौलत से भरा होता
मैं ने भी ज़मीर अपना गर बेच दिया होता

औक़ात ही क्या होती हम ख़ाक-नशीनों की
रिश्ता तिरी यादों से गर तोड़ दिया होता

गुलशन की बहारों से कुछ तो हमें मिल जाता
ग़म इस का न था दामन काँटों से भरा होता

गर तू मिरा हो जाता दुनिया मिरी हो जाती
दुनिया न ख़फ़ा होती गर तू न ख़फ़ा होता

एहसास तुम्हें होता तब मेरी तबाही का
जो वक़्त पड़ा मुझ पर तुम पर भी पड़ा होता

दुनिया से 'न'ईम' अपनी तक़दीर जुदा होती
अश्कों को मिरे उन का दामन जो मिला होता