उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham ki gahrai mein jis roz utar jaunga

ग़म की गहराई में जिस रोज़ उतर जाऊँगा

غم کی گہرائی میں جس روز اتر جاؤں گا

शायर: Naeem Badayuni6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म की गहराई में जिस रोज़ उतर जाऊँगा
बन के ख़ुशबू मैं ज़माने में बिखर जाऊँगा

हद से बढ़ जाएगा जब मेरे जुनूँ का 'आलम
संग मारेगा ज़माना मैं जिधर जाऊँगा

तू मुझे छोड़ के मत जाना ग़म-ए-जानानाँ
तुझ से बिछड़ा तो मैं तन्हाई में मर जाऊँगा

वक़्त के साथ बदल जाएगी सूरज की तपिश
वक़्त की धूप में जल कर मैं निखर जाऊँगा

जिन के साए में सुकूँ पाएँ ज़माने वाले
प्यार के ऐसे लगा के मैं शजर जाऊँगा

मैं अकेला न चलूँगा रह-ए-उल्फ़त में 'न'ईम'
ग़म मिरे साथ चलेंगे मैं जिधर जाऊँगा