उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mushkilon se jo Dar gae hote

मुश्किलों से जो डर गए होते

مشکلوں سے جو ڈر گئے ہوتے

शायर: Naeem Badayuni6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुश्किलों से जो डर गए होते
ज़िंदा कब रहते मर गए होते

वो न करते जो रहबरी अपनी
हम न जाने किधर गए होते

घर हमारा अगर नहीं होता
हादसे किस के घर गए होते

शहर की ज़िंदगी से बेहतर था
गाँव में अपने मर गए होते

काश हम भी किसी की राहों में
ख़ाक बन कर बिखर गए होते

ज़िंदगी में कभी 'न'ईम' आँसू
दो घड़ी तो ठहर गए होते