उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zinda hun main bas mujhe pata hai

ज़िंदा हूँ मैं बस मुझे पता है

زندہ ہوں میں بس مجھے پتہ ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदा हूँ मैं बस मुझे पता है
ये शह्र तो मुझ को रो चुका है

शाख़ों पे चराग़ बुझ रहे हैं
इस रुत के लबों पे बद-दु'आ है

फ़ुर्क़त से नहीं है रब्त इस का
ये रंज अलग क़बील का है

महदूद रखो ये सोग ख़ुद तक
अब जश्न शुरू' हो चुका है

मैं तो इसी रुत में झूमता हूँ
पतझड़ में शराब सा नशा है

इस रंग से फ़ासला था पहले
ये रंग जो मुझ पे खिल रहा है

वो जो है मुरीद नीम-शब का
आज आठ बजे ही सो गया है