उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aisi shai to koi haari bhi nahin

ऐसी शय तो कोई हारी भी नहीं

ایسی شے تو کوئی ہاری بھی نہیں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसी शय तो कोई हारी भी नहीं
दिल मगर रंज से 'आरी भी नहीं

अजनबी बन गए हैं सब के लिए
हम ने सूरत कोई धारी भी नहीं

कैसे पहुँचेंगे हम उस चेहरे तक
अब तसव्वुर की सवारी भी नहीं

कर दिया हम ने नदी को नाराज़
नाव पानी में उतारी भी नहीं

फूल ही फूल खिले हैं मुझ में
रुत ये हर-चंद बहारी भी नहीं

सुब्ह भी 'राज़' पहन ली हम ने
और वो रात उतारी भी नहीं