उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur kab tak use socha jae

और कब तक उसे सोचा जाए

اور کب تک اسے سوچا جائے

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और कब तक उसे सोचा जाए
नींद आ जाए तो सोया जाए

ये जो आसेब-ज़दा से घर हैं
इन के अन्दर कभी झाँका जाए

हैरतें अब तो सनद हैं तेरी
हर तमाशे पे न चौंका जाए

लफ़्ज़ हूँ मैं कई रंगों का लफ़्ज़
मुझ को 'उजलत में न बरता जाए

जिन की गर्दिश से सँवरते हैं दिन
उन सितारों को पुकारा जाए

हो गई साँझ नदी के तट पर
'राज़' अब जाल समेटा जाए