उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab rawani se hai najat mujhe

अब रवानी से है नजात मुझे

اب روانی سے ہے نجات مجھے

शायर: Vikas Sharma Raaz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब रवानी से है नजात मुझे
मुंजमिद कर गई है रात मुझे

आब-ओ-गिल एहतिजाज कर न सके
ले गई आग अपने साथ मुझे

ख़ुद से जब भी फ़रार होता हूँ
रोक लेती हैं शश-जिहात मुझे

दिल ने भी आख़िरश किया मायूस
दिल से कुछ थीं तवक़्क़ु'आत मुझे

मुंतशिर इस लिए भी रहता हूँ
याद रहते हैं वाक़ि'आत मुझे

देखिए अब नया दिखाए क्या
ये फ़ुसूँ-साज़ काएनात मुझे

मैं 'अदम की पनाह-गाह में हूँ
छू नहीं सकती अब हयात मुझे

ना-उमीदी के झुरमुटों में भी 'राज़'
ढूँढ लेते हैं मुम्किनात मुझे