उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne haalat mein badlaw nahin chahta main

अपने हालात में बदलाव नहीं चाहता मैं

اپنے حالات میں بدلاؤ نہیں چاہتا میں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने हालात में बदलाव नहीं चाहता मैं
अब किसी से कोई टकराव नहीं चाहता मैं

देर तक रखती है बे-सुध मुझे सोंधी ख़ुश्बू
दिल तिरी मिट्टी पे छिड़काव नहीं चाहता मैं

पहली बारिश में ही हो जाए बदन सब्ज़ मिरा
रफ़्ता-रफ़्ता कोई बदलाव नहीं चाहता मैं

घर के हर कमरे को सामान से भर डाला है
अपनी आवाज़ का दोहराव नहीं चाहता मैं

इस क़दर क्यों है भरोसा मुझे इन लहरों पर
क्यों कोई तिनका कोई नाव नहीं चाहता मैं

ख़ुद वो ज़ख़्मों को सिले या मुझे मर जाने दे
और इस शर्त में बदलाव नहीं चाहता मैं