उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut sa goshwara rah gaya hai

बहुत सा गोश्वारा रह गया है

بہت سا گوشوارہ رہ گیا ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत सा गोश्वारा रह गया है
मगर अब वक़्त कितना रह गया है

उगल तो दी है मैं ने रात लेकिन
मिरे अन्दर अँधेरा रह गया है

गुज़र जाते हैं सब उस को चिढ़ा कर
वो अब जंगल भी कितना रह गया है

अभी तो तीरगी पर बात की है
अभी जलना-जलाना रह गया है

हमीं बंदूक़ लहरा कर उठे थे
हमारा ही निशाना रह गया है

नदी के पार जा कर क्या करेंगे
नदी के पार अब क्या रह गया है