उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abr naddi saba ne kuchh na kaha

अब्र नद्दी सबा ने कुछ न कहा

ابر ندی صبا نے کچھ نہ کہا

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब्र नद्दी सबा ने कुछ न कहा
चुप था मैं तो फ़ज़ा ने कुछ न कहा

जब कि मेरे क़रीब से गुज़री
मुझ से तेरी सदा ने कुछ न कहा

बढ़ गई आगे रक़्स करते हुए
नक़्श-ए-पा से हवा ने कुछ न कहा

लब-कुशा सब थे जब्र-ए-शब पे मगर
इक सितारा-नुमा ने कुछ न कहा

बा'द में की मिरी पज़ीराई
पहले पहले ख़ला ने कुछ न कहा

मुझ को उम्मीद गुफ़्तुगू की थी
मुझ से लेकिन ख़ुदा ने कुछ न कहा