उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni tanhai ka sauda na hua

अपनी तन्हाई का सौदा न हुआ

اپنی تنہائی کا سودا نہ ہوا

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी तन्हाई का सौदा न हुआ
हम को मंज़ूर ख़सारा न हुआ

क़र्या-ए-जाँ वो ख़राबा जिस में
ता-अबद कोई भी जल्सा न हुआ

इस गली लौट के आना था हमें
इस गली लौट के आना न हुआ

वैसी वहशत कभी मुमकिन न हुई
हिज्र का रक़्स दुबारा न हुआ

ख़्वाब-दीवाने कहाँ जाएँगे
आँख-सहरा भी अगर वा न हुआ

मौत का वार अलग है अब के
मैं मसीहा से भी ज़िंदा न हुआ

ऐसे कुछ रम्ज़ तमाशे के खुले
फिर मुझे ज़ौक़-ए-तमाशा न हुआ