उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zard chehre pe KHush-libas aankhen

ज़र्द चेहरे पे ख़ुश-लिबास आँखें

زرد چہرے پہ خوش لباس آنکھیں

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़र्द चेहरे पे ख़ुश-लिबास आँखें
ख़ूब हँसती हैं महव-ए-यास आँखें

'ईद का चाँद है तू और तेरी
राह तकती हैं बारह मास आँखें

रूह को रूह से हो कैसे 'इश्क़
न तो दिल है न इस के पास आँखें

हर नज़र को नसीब क्यों हों हम
हम को देखें वही दो ख़ास आँखें

ज़ह्न करता है तेरे गिर्द तवाफ़
जब न हों तेरे आस-पास आँखें

मेरी आँखों में सिर्फ़ तेरे ख़्वाब
‘ख़्वाब’ की मुंतज़िर पचास आँखें