उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab to chehra bhi tera yaad nahin aata hai

अब तो चेहरा भी तिरा याद नहीं आता है

اب تو چہرہ بھی ترا یاد نہیں آتا ہے

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब तो चेहरा भी तिरा याद नहीं आता है
होश में क्यों दिल-ए-नाशाद नहीं आता है

वो किसी भूले हुए नग़्मे की धुन के मानिंद
ज़ेहन में है तो मगर याद नहीं आता है

ज़िंदगी कोई कहानी नहीं सुन ओ पगली
दर-हक़ीक़त कोई शहज़ाद नहीं आता है

अब न शीरीं कोई दिखती है सर-ए-राह-ए-'इश्क़
और नज़र अब कोई फ़रहाद नहीं आता है

हो के आज़ाद जियूँ ये उसे मंज़ूर नहीं
जान लेने पे भी सय्याद नहीं आता है