उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-fikri se sote honge

बे-फ़िक्री से सोते होंगे

بے فکری سے سوتے ہوں گے

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-फ़िक्री से सोते होंगे
कैसे लोग वो होते होंगे

सब कुछ हार के हँसने वाले
किन बातों पे रोते होंगे

रूठ नहीं पाते जो किसी से
कितने तन्हा होते होंगे

गुल अपने नाज़ुक शानों पर
ख़ुशबू कैसे ढोते होंगे

'मीर' ग़ज़ल में मोती कह कर
अपने अश्क पिरोते होंगे