उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bina bole hi sab kuchh jaan jae

बिना बोले ही सब कुछ जान जाए

بنا بولے ہی سب کچھ جان جائے

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिना बोले ही सब कुछ जान जाए
वो काश आँखों का दुख पहचान जाए

जिसे ठुकराने पर ये जान जाए
अगर अपना लें तो ईमान जाए

कोई हम से करे इतनी मोहब्बत
हमारे झूट भी सच मान जाए

अगर उम्मीद-ए-मंज़िल छोड़ बैठें
तो मुमकिन है सफ़र आसान जाए

हमारी ज़िंदगी तक हाए ज़ालिम
तग़ाफ़ुल पर तिरे क़ुर्बान जाए

फिर अपने आप के बारे में सोचें
जो ज़ेहन-ओ-दिल से तेरा ध्यान जाए

हमें इक बार सीने से लगा लो
कि दिल से दर्द का इम्कान जाए