उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab dard-e-dil se kah do ki chhup kar wahin rahe

अब दर्द-ए-दिल से कह दो कि छुप कर वहीं रहे

اب درد دل سے کہہ دو کہ چھپ کر وہیں رہے

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब दर्द-ए-दिल से कह दो कि छुप कर वहीं रहे
आँखों के आँसुओं से मरासिम नहीं रहे

इन पर हुआ न वक़्त के मरहम का कुछ असर
यादों के ऐसे ज़ख़्म हैं भर ही नहीं रहे

इक दिन बिछड़ना तय था सो आख़िर बिछड़ गए
बस है दु'आ वो ख़ुश रहे चाहे कहीं रहे

हम को है अपनी सादा-दिली पर बहुत गुमान
दुनिया अगर है हम से ज़ियादा ज़हीं रहे

मन का परिंद नक़्ल-ए-मकानी न कर सका
अब उस की ख़ैर वो जहाँ मर्ज़ी वहीं रहे