उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aah-o-girya mein kahan tasir hai

आह-ओ-गिर्या में कहाँ तासीर है

آہ و گریہ میں کہاں تاثیر ہے

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आह-ओ-गिर्या में कहाँ तासीर है
ज़ब्त में ही अश्कों की तौक़ीर है

हो गए यकसाँ उदासी और मैं
एक सूरत एक सी तस्वीर है

जो मिरी साँसों की सीलन सोख ले
क्या कोई शय इतनी भी नम-गीर है

ग़म मिरी क़िस्मत है मैं ग़म का नसीब
अपनी अपनी दोनों की तक़दीर है

एक महवर पर अज़ल से महव-ए-रक़्स
ये ज़मीं भी कोई सूफ़ी पीर है

रात भर आँखों ने लिक्खा एक ख़्वाब
ये ग़ज़ल उस ख़्वाब की ता'बीर है