उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zarar-risan hun bahut aashna hun main KHud se

ज़रर-रिसाँ हूँ बहुत आश्ना हूँ मैं ख़ुद से

ضرر رساں ہوں بہت آشنا ہوں میں خود سے

शायर: Umair Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़रर-रिसाँ हूँ बहुत आश्ना हूँ मैं ख़ुद से
जभी तो फ़ासला रख कर खड़ा हूँ मैं ख़ुद से

सलाम कौन कहीं मिल चुके हैं क्या पहले
हज़ार बार ये सब कह चुका हूँ मैं ख़ुद से

झगड़ते वक़्त ज़रा भी ख़याल रखता नहीं
अगरचे 'उम्र में काफ़ी बड़ा हूँ मैं ख़ुद से

मुझे मिली है गुज़िश्ता बरस की इक तस्वीर
कहीं कहीं से बहुत मिल रहा हूँ मैं ख़ुद से

सवाल लिख के यहाँ रख दो और तुम जाओ
ये काम कर लूँ तो फिर पूछता हूँ मैं ख़ुद से

कहाँ तलाश करूँ क्या कहूँ किसी से 'उमैर'
कि आते-जाते कहीं गिर गया हूँ मैं ख़ुद से