उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zamana apna tha apna barabar jab zamana tha

ज़माना अपना था अपना बराबर जब ज़माना था

زمانہ اپنا تھا اپنا برابر جب زمانہ تھا

शायर: Ufuq Lakhnavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़माना अपना था अपना बराबर जब ज़माना था
था रब्त-ओ-ज़ब्त क़िस्मत से फ़लक से दोस्ताना था

जहाँ गुलज़ार में चुनते हो तुम बिखरे हुए तिनके
कभी मेरा भी वाँ ऐ हम-सफ़ीरो आशियाना था

तुयूर-ए-बाग़ क्यों सय्याद तेरे जाल में फँसते
वहीं तक़दीर ले आई जहाँ का आब-ओ-दाना था

फड़कने भी न पाया ताइर-ए-जाँ नीम-बिस्मिल मैं
ग़ज़ब की नोक-ए-नावक थी क़यामत का निशाना था

वही है ऐ 'उफ़ुक़' लैला-वशों में सरगुज़िश्त अपनी
जो क़िस्सा कोहकन का था जो मजनूँ का फ़साना था